गुरुवार, नवंबर 16, 2017

कांग्रेस में आजकल क्या चल रहा है...नर्मदा यात्रा


(अनुराग तागड़े)
नर्मदे हर...की गूंज और कांग्रेस नेता की पूछपरख दोनों में समानताओं का दौर जब चलने लगे तब अनुभवी कांग्रेसी नेता पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के दबदबे का एहसास होता है। नर्मदा किनारे वे यात्रा कर रहे है और कयासो का दौर लगातार चलते जा रहा है। शहर कांग्रेस से लेकर प्रदेश कांग्रेस में बस एक ही बात है क्या चल रहा इन दिनों कांग्रेस में बस नर्मदा यात्रा चल रही है। सही मायने में नर्मदा यात्रा के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री छालो,पैरों का दर्द और यात्रा करने का सुकुन का एहसास जरुर कर रहे है परंतु यह यात्रा स्पंदन पैदा कर रही है कांग्रेस में और आम कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में। दिग्विजय सिंह भले ही रोजाना कुछ किलोमीटर पैदल चल रहे हो पर नर्मदा किनारे से कई किलोमीटर दूर तक यात्रा का असर नजर आता है। यात्रा को देखादेखी की यात्रा शुरुवाती दौर में कहा जा रहा था परंतु जिन लोगो ने यात्रा को करीब से देखा वे कहने लगे कि ये क्या नेताजी सही मायने में चल रहे है और नर्मदा किनारे पैदल ही चल रहे है और कोई दिखावा नहीं। प्रदेश कांग्रेस के भीतर हल्के उत्साह की लहर अभी भी न महसूस की जा रही हो परंतु जिस उत्साह से नर्मदा के किनारे पूर्व मुख्यमंत्री का स्वागत कर रहा है वह अपने आप में अलग बात है। मां नर्मदा परिकम्मा वासियों का ख्याल रखती है और 3 वर्ष 3 महीने तक यह यात्रा चलती है और अक्सर यह देखा जाता है कि नर्मदा यात्रा के पश्चात सबकुछ त्याग करना सामान्य सी बात है मन नहीं लगता दुनियादारी में और व्यक्ति एकनिष्ठ होकर भगवतप्राप्ती की ओर लग जाता है। नर्मदा परिक्रमा अनुभवों की ऐसी लंभी श्रृंखला है जिसमें पाप पुण्य से परे व्यक्ति खुद की खोज में लगता है। कर्म की शक्ति ओर भाग्य का साथ होगा की नहीं यह नहीं सोचता बस नर्मदे हर में सबकुछ समाया होता है। पूर्व मुख्यमंत्री यह बात भी नर्मदा यात्रा के दौरान दिग्विजय सिंह भूल गए होंगे क्योंकि वे मन के मैल को नर्मदा के जल से धो रहे है वे इस नर्मदा यात्रा में खुद को नए तरीके से खोज रहे है जिसमें आत्ममंथन,आत्मविश्लेषण सबकुछ अपने आप हो ही जाता है। नर्मदा किनारे का हरेक शिवाला मुक्ति का केंद्र है और भक्ति को बढ़ाने वाला है। दिग्विजय सिंह नर्मदा यात्रा में आत्मसम्मान से परे आत्मा का सम्मान करने निकले है। वे भले ही लोकप्रियता नहीं चाहते हो परंतु मां नर्मदा के किनारे उनके लिए भीड़ खींच रहे है और यह भीड़ ठेठ ग्रामीणों की है जिनके लिए दिग्विजय सिंह का नर्मदा किनारे घूमना ही अपने आप में अजूबा है। उनके लिए बड़े साहब भी नर्मदा परिक्रमा लगा रहे है यह बात ज्यादा महत्वपूर्ण है और ये हमारे जैसे ही है। दिग्विजय सिंह ने आरंभ में ही कह दिया था कि यह मेरा वैयक्तिक मामला है और इसे राजनीति से ना जोड़ा जाए पर ऐसा होता है क्या? प्रदेश के बड़े कांग्रेसी भी जुड़े ओर अब यह लोकप्रियता के मामले में दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा सोशल मीडिया पर भी जोर पकड़ते नजर आ रही है। दिग्विजय सिंह जहा पर भी जा रहे है वहा की स्थानीय गतिविधियां जो भी चल रही है उसमें भी शामिल हो जाते है। उनका यह स्वरुप लोगो को पसंद आ रहा है। दिखावे से दूर गमछा बांधे दिग्विजय सिंह लोगो को अपने से लग रहे है और नेता से परे आम आदमी जैसे लग रहे है। दिग्विजय सिंह की यह नर्मदा यात्रा अपने आप में कई बातों को समाहित किए हुए है। यात्रा के समापन के पश्चात एक तप किए हुए दिग्विजय सिंह सामने आएंगे जो आम जनता से मिलकर और उनकी भावनाओं को समझकर अपना अगला कदम रखेंगे जो निश्चित रुप से प्रदेश कांग्रेस में अलग ही लहर पैदा करेगा। 

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