गुरुवार, नवंबर 16, 2017

चकमस्ती में आग लगे बस्ती में...


(अनुराग तागड़े)
भिया किधर....मल्लारगंज काम से जा रिया हूँ अरे मेरे को भी छोड दे यार राजवाड़े पे...आ बैठ चलते हे। भिया सही के रिया हूँ अपने सेर की बात ही अलग हेगी...खाने पीने में सबकुछ एक नंबर हेगा...हां भिया पर मेरे को लग रिया हेगा कि सेर में अब राजनीतिवाले लोगोन काम बिगाड़े भोत कर रिये हेंगे...अपने लोगोन तो क्या है किधर भी कुछ भी कर लियो बोलते ही नी हेंगे। वो भिया परसो में सांची वाले से झिगझिग कर रिया था अरे वो मानने को ही तैयार नी हेगा कि गलती हो गई हेगी। भिया ये लोगोन सुधरने को तैयार ही नी मेने बोला भिया क्या हुआ तुम्हारे टैंकरोन का...मिलावट तो भोत की तुम लोगोन ने अब भी नी मान रिये हो। वो बोला भिया तुम मान ही नी रिये हो अब सबकुछ सहीसाट चल रिया हेगा। भिया अपन तो एबले हेंगे बोल दिया परमाण क्या हेगा? अपना दिमाग सटका तो फिर अपन किसी के नी...पर तुम लोगोन सांची का दूध लेते थे क्या वो दुकान से...नी भिया वो तो ऐसे ही मजे ले रिया था ईन लोगोन को भी तो समझ में आनी चिए ना कि हम भी कम थोड़े ही हे। पर भिया अपना तो सोचना ही ऐसा हेगा कि रहो चकमस्ती में आग लगे बस्ती में पर ये लोगोन सुधरहीच नी रिये हे। एक वो लोगोन हे वो बुखार वुखार आ के लोगोन ठीक हो गए ओर ये भिया लोगोन अब जाके वो मच्छरोन के पीछे जा रिये हेंगे। भिया में तो केता हूँ इन लोगोन को अपनी पड़ी रेती हेगी अपने सेर का क्या होगा इन लोगोन को थोड़े ही पता....ये तो अपन लोग ही हेंगे जो इत्ता विचार करते है नी तो ये लोगोन तो सेर जाए भाड़ में अपनी मोजमस्ती में लगे रेते हेंगे...बस ये अन्ना भिया के पास में उतार दे....चल मिलते फिर। ओर क्या भिया भोत दिनों बाद आए इधर...अरे वो अपना एक चेला हेगा वो उधर जा रिया था मेने का मेरे को वहां तक छोड़ दे भोत दिन हो गए राजवाड़े गए। ये कोन से चेले को पकड लिया भिया...अरे अपने भोत चेले हेंगे....बोलो भिया बोल्डर की सिकी....!

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